
देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़े में जांच आगे बढ़ने के साथ नए खुलासे सामने आ रहे हैं। फर्जी प्रमाण-पत्रों के सहारे एमबीबीएस की सरकारी सीट हासिल करने के आरोपों की जांच कर रही पुलिस ने मंगलवार को दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ की एक कंसलटेंसी का संचालक रूपेश पंडित और एक मेडिकल छात्रा का पिता शामिल है। पुलिस रूपेश पंडित को कथित गिरोह का सरगना मान रही है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि एमबीबीएस की सरकारी सीट दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 45-45 लाख रुपये में सौदा किया गया था। जांच का दायरा बढ़ने के साथ एसआईटी के रडार पर करीब 12 अन्य लोग भी आ गए हैं। पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर इनमें से कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
फर्जी प्रमाण-पत्रों से सरकारी सीट हासिल करने का आरोप
यह पूरा मामला एमबीबीएस की सरकारी सीटों पर दाखिले से जुड़ा है। आरोप है कि पात्रता से जुड़े फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कराकर अभ्यर्थियों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिलाने की कोशिश की गई। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि प्रमाण-पत्र कहां और किसकी मदद से तैयार किए गए तथा प्रवेश प्रक्रिया में उनका इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया।
जांच के दौरान कंसलटेंसी संचालक रूपेश पंडित की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उससे संबंधित जानकारियां जुटानी शुरू कीं। पुलिस का मानना है कि वह अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से संपर्क कर सरकारी मेडिकल सीट दिलाने का भरोसा देता था। इसके बदले लाखों रुपये की रकम लिए जाने का आरोप है।
45 लाख रुपये में एक सीट का सौदा
पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि कथित तौर पर एमबीबीएस की एक सरकारी सीट के लिए 45 लाख रुपये तक का सौदा किया गया था। इतनी बड़ी रकम सामने आने के बाद जांच एजेंसियां अब आरोपियों के वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं।
यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से ली गई रकम किस माध्यम से आरोपियों तक पहुंची। यदि बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों से भुगतान हुआ है तो उससे जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। नकद लेनदेन के आरोपों की स्थिति में पुलिस अन्य साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों का सहारा ले सकती है।
मेरठ की कंसलटेंसी का संचालक बताया जा रहा सरगना
गिरफ्तार रूपेश पंडित मेरठ में कंसलटेंसी संचालित करता है। पुलिस उसे इस कथित नेटवर्क का प्रमुख व्यक्ति मानकर जांच कर रही है। उससे पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कंसलटेंसी के माध्यम से कितने अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से संपर्क किया गया था। इसके अलावा क्या इसी तरीके से पूर्व में भी किसी अभ्यर्थी को मेडिकल या अन्य पाठ्यक्रम में दाखिला दिलाया गया, इसकी जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
मेडिकल छात्रा के पिता की भी गिरफ्तारी
पुलिस ने मामले में एक मेडिकल छात्रा के पिता को भी गिरफ्तार किया है। उन पर कथित फर्जीवाड़े में भूमिका होने का आरोप है। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि उन्होंने कंसलटेंसी संचालक से कब और कैसे संपर्क किया और दाखिले से संबंधित प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका रही।
पुलिस के लिए अब यह स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्रमाण-पत्र किसके कहने पर तैयार कराए गए और उन्हें दाखिले की प्रक्रिया में किस तरह इस्तेमाल किया गया। इस सिलसिले में दस्तावेजों की जांच के साथ संबंधित विभागों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है।
SIT के रडार पर करीब 12 लोग
मामले की जांच कर रही एसआईटी के रडार पर करीब 12 अन्य लोग भी बताए जा रहे हैं। इनमें फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार करने, उनका इस्तेमाल करने या पूरे नेटवर्क को संचालित करने में संभावित भूमिका वाले लोगों की जांच की जा रही है।
एसआईटी इन लोगों से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है। जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर कुछ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।
हालांकि किसी व्यक्ति का जांच के दायरे में होना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है। आरोपों की पुष्टि जांच और बाद की न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
फर्जी प्रमाण-पत्र कहां बने इसकी जांच
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि कथित फर्जी प्रमाण-पत्र कहां और किसके माध्यम से तैयार किए गए। यदि प्रमाण-पत्र सरकारी विभागों से संबंधित थे तो यह भी जांच का विषय होगा कि उनमें फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका थी।
पुलिस प्रमाण-पत्रों की सत्यता की पुष्टि संबंधित विभागों से करा सकती है। इसके साथ ही दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षर, मुहर और अन्य विवरणों का मिलान आधिकारिक रिकॉर्ड से किया जा सकता है।
दाखिला प्रक्रिया की भी हो सकती है जांच
मामला सरकारी एमबीबीएस सीटों से जुड़ा होने के कारण प्रवेश प्रक्रिया के विभिन्न चरण भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। यह पता लगाया जाएगा कि कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई और वे शुरुआती सत्यापन में कैसे स्वीकार हुए।
फिलहाल दो गिरफ्तारियों के बाद एसआईटी का फोकस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने पर है। रूपेश पंडित से पूछताछ में सामने आई जानकारियों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। करीब 12 अन्य लोगों के जांच के दायरे में आने से आने वाले दिनों में मामले में और खुलासे तथा कार्रवाई संभव है।





